208. Передают со слов Ибн Аббаса, сказавшего: «Когда снизошел этот аят: «И предупреди своих ближайших родственников и среди них твоих преданных соплеменников.» — Тогда Посланник Аллаха, вышел и поднялся на Аль-Сафу и прокричал: «Родные мои!» Люди сказали: «Кто этот зовущий?» Им ответили: «Мухаммад.» Они собрались перед ним и он сказал: «Сыны такого-то! Сыны такого-то! Сыны такого-то! Сыны Абд-манафа! Сыны Абдульмуталиба!» Они собрались перед ним и он произнес: «Если бы я сообщил вам, что за этой горой (на нас) движется конница, вы бы поверили мне?» Они ответили: «За тобой мы не видели лжи.» Он произнес: «Так вот, я донес вам предостережение о приближающемся сильном наказании!» Абу Ляхаб сказал: «Пропади ты пропадом! Ты нас для этого собрал?» Затем он сказал: «И снизошла эта сура: «Пусть пропадут пропадом обе руки Абу Ляхаба и сам он уже сгинул!» Так прочел (этот аят) Аль-Амаш и достиг конца этой суры.»
355 — (208) وحدثنا أبو كريب محمد بن العلاء. حدثنا أبو أسامة عن الأعمش، عن عمرو بن مرة، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس؛ قال: لما نزلت هذه الآية: {وأنذر عشيرتك الأقربين} [26/الشعراء/ الآية-214] ورهطك منهم المخلصين. خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى صعد الصفا. فهتف "يا صباحاه!" فقالوا: من هذا الذي يهتف؟ قالوا: محمد. فاجتمعوا إليه، فقال "يا بني فلان! يا بني فلان! يا بني فلان! يا بني عبد مناف! يا بني عبدالمطلب!" فاجتمعوا إليه فقال "أرأيتكم لو أخبرتكم أن خيلا تخرج بسفح هذا الجبل أكنتم مصدقي؟" قالوا: ما جربنا عليك كذبا. قال "فإني نذير لكم بين يدي عذاب شديد". قال فقال أبو لهب: تبا لك! أما جمعتنا إلا لهذا؟ ثم قام. فنزلت هذه السورة: {تبت يدا أبي لهب و قد تب} [111/المسد/ الآية-1]. كذا قرأ الأعمش إلى آخر السورة.
356 — (208) وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة وأبو كريب. قالا: حدثنا أبو معاوية عن الأعمش، بهذا الإسناد. قال:
صعد رسول الله صلى الله عليه وسلم ذات يوم الصفا فقال "يا صباحاه!" بنحو حديث أبي أسامة. ولم يذكر نزول الآية:{وأنذر عشيرتك الأقربين}.