906. Асма Бинт Абу Бакр сказала: «Однажды, Пророк, был напуган». Она сказала: «Она имела ввиду день затмения солнца». Он взял кольчугу и надел ее на свой плащ. Он стоял и молился во главе людей долго. Если бы человек пришел, то он не почувствовал совершал ли Пророк, рукуг из-за того, что (Пророк) стоял так долго».
14 — (906) حدثنا يحيى بن حبيب الحارثي. حدثنا خالد بن الحارث. حدثنا ابن جريج. حدثني منصور بن عبدالرحمن عن أمه صفية بنت شيبة، عن أسماء بنت أبي بكر ؛ أنها قالت:
فزع النبي صلى الله عليه وسلم يوما. (قالت تعنى يوم كسفت الشمس) فأخذ درعا حتى أدرك بردائه. فقام للناس قياما طويلا. لو أن إنسانا أتى لم يشعر أن النبي صلى الله عليه وسلم ركع — ما حدث أنه ركع، من طول القيام.
15 — (906) وحدثني سعيد بن يحيى الأموى. حدثني أبي. حدثنا ابن جريج، بهذا الإسناد، مثله. وقال: قياما طويلا. يقوم ثم يركع. وزاد: فجعلت أنظر إلى المرأة أسن مني. وإلى الأخرى وهي أسقم مني.
16 — (906) وحدثني أحمد بن سعيد الدارمي. حدثنا حبان. حدثنا وهيب. حدثنا منصور عن أمه، عن أسماء بنت أبي بكر. قالت:
كسفت الشمس على عهد النبي صلى الله عليه وسلم. ففزع، فأخطأ بدرع، حتى أدرك بردائه بعد ذلك. قالت: فقضيت حاجتي ثم جئت ودخلت المسجد. فرأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم قائما. فقمت معه. فأطال القيام حتى رأيتني أريد أن أجلس ثم ألتفت إلى المرأة الضعيفة، فأقول هذه أضعف مني، فأقوم. فركع فأطال الركوع. ثم رفع رأسه فأطال القيام. حتى لو أن رجلا جاء — خيل إليه أنه لم يركع.