Муслим — 1599.

1599. Сообщают от Аль-Нумана Ибн Башира. Он сказал: «Я слышал, как Посланник Аллаха, говорил, — при этом Усман показал двумя своими пальцами на свои уши: «Истинно, халяль — ясен и, истинно, харам — ясен. Но меж ними обоими — нечёткие (по своему статусу деяния и вещи), не знает которые множество людей. И тот, кто избежал нечёткостей, тот не запятнал ни своего вероустава, ни своей чести, а кто пал в нечёткости, тот пал в харам. Как пастух, пасущий вокруг (чужого) заповедника, едва не загоняющий на него (свой скот). О, да — у каждого Владыки (есть свой) заповедник! О, да — а заповедник Аллаха — запреты Его. О, да -истинно, в теле (есть) кусок. Если он годен, то годно всё тело, а если он испортился, то испортилось всё тело. О, да, это — сердце!»

107 — 1599 حدثنا محمد بن عبدالله بن نمير الهمداني. حدثنا أبي. حدثنا زكرياء عن الشعبي، عن النعمان بن بشير. قال: سمعته يقول:

سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: (وأهوى النعمان بإصبعيه إلى أذنيه) (إن الحلال بين وإن الحرام بين وبينهما مشتبهات لا يعلمهن كثير من الناس. فمن اتقى الشبهات استبرأ لدينه وعرضه. ومن وقع في الشبهات وقع في الحرام. كالراعي يرعى حول الحمى. يوشك أن يرتع فيه. ألا وإن لكل ملك حمى. ألا وإن حمى الله محارمه. إلا وإن في الجسد مضغة، إذا صلحت صلح الجسد كله وإذا فسدت، فسد الجسد كله. ألا وهي القلب).

1599 — وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة. حدثناوكيع. ح وحدثنا إسحاق ابن إبراهيم. أخبرنا عيسى بن يونس. قالا: حدثنا زكريا، بهذا الإسناد، مثله.

2 م — 1599 وحدثنا إسحاق بن إبراهيم. أخبرنا جرير عن مطرف وأبي فروة الهمذاني. وحدثنا قتيبة بن سعيد. حدثنا يعقوب (يعني ابن عبدالرحمن القاري) عن ابن عجلان، عن عبدالرحمن ابن سعيد. عن النعمان بن بشير، عن النبي صلى الله عليه وسلم، بهذا الحديث. غير أن حديث زكرياء أتم من حديثهم، وأكثر.

108 — 1599 حدثنا عبدالملك بن شعيب بن الليث بن سعد. حدثني أبي عن جدي. حدثني خالد بن يزيد. حدثني سعيد بن أبي هلال عن عون بن عبدالله، عن عامر الشعبي؛ أنه سمع نعمان بن بشير بن سعد، صاحب رسول الله صلى الله عليه وسلم وهو يخطب في الناس بحمص. وهو يقول:

سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول (الحلال بين والحرام بين). فذكر بمثل حديث زكرياء عن الشعبي. إلى قوله: (يوشك أن يقع فيه).

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