Муслим — 1656.

1656. Передают от Нафиа, сказавшего: «При Ибн Умаре было упомянуто об умре Посланника Аллаха, из Аль-Джураны и он сказал: «Он совершил умру не от неё.» Он сказал: «В эпохе дикости Умар обетовал итикяф одной ночи…» Затем он упомянул хадис, сходный с предыдущим.

27 — 1656 حدثنا محمد بن أبي بكر المقدمي ومحمد بن المثنى وزهير بن حرب (واللفظ لزهير). قالوا: حدثنا يحيى (وهو ابن سعيد القطان) عن عبيدالله. قال: أخبرني نافع عن ابن عمر؛

أن عمر قال: يا رسول الله! إني نذرت في الجاهلية أن أعتكف ليلة في المسجد الحرام. قال (فأوف بنذرك).

1656 — وحدثنا أبو سعيد الأشج. حدثنا أبو أسامة. ح وحدثنا محمد بن المثنى. حدثنا عبدالوهاب (يعني الثقفي). ح وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة ومحمد بن العلاء وإسحاق بن إبراهيم. جميعا عن حفص بن غياث. ح وحدثنا محمد بن عمرو بن جبلة بن أبي رواد. حدثنا محمد بن جعفر. حدثنا شعبة. كلهم عن عبيدالله، عن نافع، عن ابن عمر. وقال حفص، من بينهم: عن عمر، بهذا الحديث. أما أبو أسامة والثقفي ففي حديثهما: اعتكاف ليلة. وأما في حديث شعبة فقال: جعل عليه يوما يعتكفه. وليس في حديث حفص، ذكر يوم ولا ليلة.

28 — 1656 وحدثني أبو الطاهر. أخبرنا عبدالله بن وهب. حدثنا جرير بن حازم؛ أن أيوب حدثه؛ أن نافعا حدثه؛ أن عبدالله بن عمر حدثه؛

أن عمر بن الخطاب سأل رسول الله صلى الله عليه وسلم، وهو بالجعرانة، بعد أن رجع من الطائف، فقال: يا رسول الله! إني نذرت في الجاهلية أن أعتكف يوما في المسجد الحرام. فكيف ترى؟ قال (اذهب فاعتكف يوما).

قال: وكان رسول الله صلى الله عليه وسلم قد أعطاه جارية من الخمس. فلما أعتق رسول الله صلى الله عليه وسلم سبايا الناس، سمع عمر بن الخطاب أصواتهم يقولون: أعتقنا يا رسول الله صلى الله عليه وسلم. فقال: ما هذا؟ فقالوا: أعتق رسول الله صلى الله عليه وسلم سبايا الناس. فقال عمر: يا عبدالله! اذهب إلى تلك الجارية فخل سبيلها.

1656 — وحدثنا عبد بن حميد. أخبرنا عبدالرزاق. أخبرنا معمر عن أيوب، عن نافع، عن ابن عمر. قال: لما قفل النبي صلى الله عليه وسلم من حنين سأل عمر رسول الله صلى الله عليه وسلم عن نذر كان نذره في الجاهلية، اعتكاف يوم. ثم ذكر بمعنى حديث جرير بن حازم.

2 م — 1656 وحدثنا أحمد بن عبدة الضبي. حدثنا حماد بن زيد. حدثنا أيوب عن نافع. قال: ذكر عند ابن عمر عمرة رسول الله صلى الله عليه وسلم من الجعرانة. فقال: لم يعتمر منها. قال: وكان عمر نذر اعتكاف ليلة في الجاهلية. ثم ذكر نحو حديث جرير بن حازم ومعمر عن أيوب.

3 م — 1656 وحدثني عبدالله بن عبدالرحمن الدارمي. حدثنا حجاج ابن المنهال. حدثنا حماد عن أيوب. ح وحدثنا يحيى بن خلف. حدثنا عبدالأعلى عن محمد بن إسحاق. كلاهما عن نافع، عن ابن عمر، بهذا الحديث في النذر. وفي حديثهما جميعا: اعتكاف يوم.

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