Муслим — 1688.

1688. Аиша, супруга Пророка, сообщила, что Курайш взволновало дело женщины, укравшей в эпоху Посланника Аллаха, в походе на взятие Мекки, и спросили: «Кто поговорит о ней с Посланником Аллаха?» И ответили: «Кто же дерзнёт на такое, кроме Усамы, любимчика Посланника Аллаха, ?» К ней был приведён Посланник Аллаха, и с ним о ней поговорил Усама Ибн Зэйд. Но лицо Посланника Аллаха, изменило цвет и он произнёс: «Ты что, заступаешься за неё, чтобы экзекуция установленная Аллахом не была исполнена?!» И Усама сказал ему: «Попроси мне прощения, Посланник Аллаха!» Когда наступил вечер, Посланник Аллаха, встал и произнёс речь, сказав доброе об Аллахе, как Он того заслуживает, а затем сказал: «Итак! Живших до вас погубило то, что они, если среди них украдёт знатный человек, они его оставляют, а если украдёт слабый, то в его отношении они проводят экзекуцию. Но я, клянусь Тем, в руке Которого моя душа, если Фатима дочь Мухаммада, украдёт, то я обязательно отрублю ей руку!» Затем он отдал распоряжение о той женщине и ей была отрублена рука. Юнус сказал: «Ибн Шихаб сказал: «Урва сказал: «Аиша сказала: «Раскаяние той женщины впоследствии было прекрасным и она вышла замуж и приходила ко мне после этого и я передавала о её нужде Посланнику Аллаха, !»

8 — 1688 حدثنا قتيبة بن سعيد. حدثنا ليث. ح وحدثنا محمد بن رمح. أخبرنا الليث عن ابن شهاب، عن عروة، عن عائشة؛

أن قريشا أهمهم شأن المرأة المخزومية التي سرقت. فقالوا: من يكلم فيها رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ فقالوا: ومن يجترئ عليه إلا أسامة، حب رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ فكلمه أسامة. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم (أتشفع في حد من حدود الله؟) ثم قام فاختطب فقال (أيها الناس! إنما أهلك الذين قبلكم، أنهم كانوا إذا سرق فيهم الشريف، تركوه. وإذا سرق فيهم الضعيف، أقاموا عليه الحد. وايم الله! لو أن فاطمة بنت محمد سرقت لقطعت يدها).

وفي حديث رمح (إنما هلك الذين من قبلكم).

9 — 1688 وحدثني أبو الطاهر وحرملة بن يحيى (واللفظ لحرملة). قالا: أخبرنا ابن وهب. قال: أخبرني يونس بن يزيد عن ابن شهاب. قال: أخبرني عروة بن الزبير عن عائشة زوج النبي صلى الله عليه وسلم؛

أن قريشا أهمهم شأن المرأة المخزومية التي سرقت في عهد النبي صلى الله عليه وسلم. في غزوة الفتح. فقالوا: من يكلم فيها رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ فقالوا: ومن يجترئ عليه إلا أسامة بن زيد، حب رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ فأتى بها رسول الله صلى الله عليه وسلم. فكلمه فيها أسامة بن زيد. فتلون وجه رسول الله صلى الله عليه وسلم. فقال (أتشفع في حد من حدود الله؟) فقال له أسامة: استغفر لي. يا رسول الله! فلما كان العشي قام رسول الله صلى الله عليه وسلم فاختطب. فأثنى على الله بما هو أهله. ثم قال (أما بعد. فإنما أهلك الذين من قبلكم، أنهم كانوا إذا سرق فيهم الشريف، تركوه. وإذا سرق فيهم الضعيف، أقاموا عليه الحد. وإني، والذي نفسي بيده! لو أن فاطمة بنت محمد سرقت لقطعت يدها) ثم أمر بتلك المرأة التي سرقت فقطعت يدها.

قال يونس: قال ابن شهاب: قال عروة: قالت عائشة: فحسنت توبتها بعد. وتزوجت. وكانت تأتيني بعد ذلك فأرفع حاجتها إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم.

10 — 1688 وحدثنا عبد بن حميد. أخبرنا عبدالرزاق. أخبرنا معمر عن الزهري، عن عروة، عن عائشة. قالت: كانت امرأة مخزومية تستعير المتاع وتجحده. فأمر النبي صلى الله عليه وسلم أن تقطع يدها. فأتى أهلها أسامة بن زيد فكلموه. فكلم رسول الله صلى الله عليه وسلم فيها. ثم ذكر نحو حديث الليث ويونس.

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