Муслим — 1714.

1714. Сообщают со слов Аишы, сказавшей: «Пришла Хинд к Пророку, и сказала: «Посланник Аллаха, клянусь Аллахом — так как я боюсь, что опекаемые тобою будут унижены Аллахом я не боюсь на поверхности Земли ни за каких других опекаемых. Так как я желаю, чтобы опекаемые тобою были почтены Аллахом я не желаю на поверхности Земли ни каким другим опекаемым.» И Пророк, сказал: «Взаимно, клянусь Тем, в руке Которого моя душа!» Затем она сказала: «Посланник Аллаха, Абу Суфьян мужчина скупой, но будет ли на мне грех, если я стану брать средства на содержание его иждивенцев без его ведома?» И Пророк, ответил: «Не будет греха на тебе, если станешь добром тратиться на них.»

7 — 1714 حدثني علي بن حجر السعدي. حدثنا علي بن مسهر عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة. قالت:

دخلت هند بنت عتبة، امرأة أبي سفيان، على رسول الله صلى الله عليه وسلم. فقالت: يا رسول الله! إن أبا سفيان رجل شحيح. لا يعطيني من النفقة ما يكفيني ويكفي بني. إلا ما أخذت من ماله بغير علمه. فهل علي في ذلك من جناح؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم (خذي من ماله بالمعروف، ما يكفيك ويكفي بنيك).

1714 — وحدثناه محمد بن عبدالله بن نمير وأبو كريب. كلاهما عن عبدالله بن نمير ووكيع. ح وحدثنا يحيى بن يحيى. أخبرنا عبدالعزيز ابن محمد. ح وحدثنا محمد بن رافع. حدثنا ابن أبي فديك. أخبرنا الضحاك (يعني ابن عثمان). كلهم عن هشام، بهذا الإسناد.

8 — 1714 وحدثنا عبد بن حميد. أخبرنا عبدالرزاق. أخبرنا معمر عن الزهري، عن عروة، عن عائشة. قالت:

جاءت هند إلى النبي صلى الله عليه وسلم. فقالت: يا رسول الله! والله! ما كان على ظهر الأرض أهل خباء أحب إلي من أن يذلهم الله من أهل خبائك. وما على ظهر الأرض أهل خباء أحب إلي من أن يعزهم الله من أهل خبائك. فقال النبي صلى الله عليه وسلم (وأيضا. والذي نفسي بيده!). ثم قالت: يا رسول الله! إن أبا سفيان رجل ممسك. فهل علي حرج أن أنفق على عياله من ماله بغير إذنه؟ فقال النبي صلى الله عليه وسلم (لا حرج عليك أن تنفقي عليهم بالمعروف).

9 — 1714 حدثنا زهير بن حرب. حدثنا يعقوب بن إبراهيم. حدثنا ابن أخي الزهري عن عمه. أخبرني عروة بن الزبير؛ أن عائشة قالت:

جاءت هند بنت عتبة بن ربيعة فقالت: يا رسول الله! والله! ما كان على ظهر الأرض خباء أحب إلي من أن يذلوا من أهل خبائك. وما أصبح اليوم على ظهر الأرض خباء أحب إلي من أن يعزوا من أهل خبائك. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم (وأيضا. والذي نفسي بيده!). ثم قالت: يا رسول الله! إن أبا سفيان رجل مسيك. فهل علي حرج من أن أطعم، من الذي له، عيالنا؟ فقال لها (لا. إلا بالمعروف).

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