2269. Ибн Аббас передавал, что некий мужчина пришёл к Посланнику Аллаха, и сказал: «Посланник Аллаха! Вижу я сегодня ночью во сне тент, источающий масло и мёд. И вижу, люди наполняют от него свои ладони — одни брали много, другие мало. И вижу вервь, протянутую с неба на Землю. И вижу тебя — ты взялся за неё и возвысился. Затем взялся за неё мужчина после тебя и возвысился. Затем взялся за неё иной мужчина и возвысился. Затем взялся за неё иной мужчина, но она оборвалась с ним, но затем была соединена для него, и он возвысился». Абу Бакр сказал: «Посланник Аллаха, ты мне как отец и мать, клянусь Аллахом -ты дашь мне сейчас возможность растолковать оное самому!» Посланник Аллаха, сказал: «Растолкуй оное!» Абу Бакр сказал: «Касательно тента, тень от него — Ислам. То же, что источалось маслом и мёдом, это — Коран, его сласть и нежность. Относительно (эпизода) наполнения людьми от этого своих ладоней — берущий много от Корана и берущий мало. Вервь, протянутая с неба на Землю — истина, на которой ты. Ты берешься за неё и Аллах возвышает тебя ею. Затем берётся за неё мужчина после тебя и возвышается с нею, затем берётся за неё иной мужчина и возвышается с нею, затем за неё берётся иной мужчина, но она обрывается с ним, но затем соединяется для него, и он возвышается с нею. Сообщи же мне, Посланник Аллаха, ты мне как отец и мать, — я правильно сказал или ошибся?» Посланник Аллаха, ответил: «Кое-где ты сказал правильно, кое-где ошибся». Он сказал: «Клянусь Аллахом, ты (сейчас же) расскажешь мне, в чём я ошибся!» Он ответил: «Не клянись!»
17 — 2269 حدثنا حاجب بن الوليد. حدثنا محمد بن حرب عن الزبيدي. أخبرني الزهري عن عبيدالله بن عبدالله؛ أن ابن عباس أو أبا هريرة كان يحدث؛ أن رجلا أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم. ح وحدثني حرملة بن يحيى التجيبي (واللفظ له). أخبرنا ابن وهب. أخبرني يونس عن ابن شهاب؛ أن عبيدالله بن عتبة أخبره؛ أن ابن عباس كان يحدث؛
أن رجلا أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله إني أرى الليلة ظلة تنطف السمن والعسل. فأرى الناس يتكففون منها بأيديهم. فالمستكثر والمستقل. وأرى سببا واصلا من السماء إلى الأرض. فأراك أخذت به فعلوت. ثم أخذ به من بعدك فعلا. ثم أخذ به رجل آخر فعلا. ثم أخذ به رجل آخر فانقطع به. ثم وصل له فعلا. قال أبو بكر: يا رسول الله بأبي أنت. والله لتدعني فلأعبرنها. قال رسول الله صلى الله عليه وسلم "اعبرها" قال أبو بكر: أما الظلة فظلة الإسلام. وأما الذي ينطف من السمن والعسل فالقرآن. حلاوته ولينه. وأما ما يتكفف الناس من ذلك فالمستكثر من القرآن والمستقل. وأما السبب الواصل من السماء إلى الأرض فالحق الذي أنت عليه. تأخذ به فيعليك الله به ثم يأخذ به رجل من بعدك فيعلو به. ثم يأخذ به رجل من بعدك فيعلو به. ثم يأخذ به رجل آخر فينقطع به ثم يوصل له فيعلو به. فأخبرني يا رسول الله بأبي أنت أصبت أم أخطأت؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم "أصبت بعضا وأخطأت بعضا" قال: فوالله يا رسول الله لتحدثني ما الذي أخطأت؟ قال "لا تقسم"
17 -م — 2269 وحدثناه ابن أبي عمر. حدثنا سفيان عن الزهري، عن عبيدالله بن عبدالله، عن ابن عباس. قال
جاء رجل النبي صلى الله عليه وسلم منصرفه من أحد. فقال: يا رسول الله إني رأيت هذه الليلة في المنام ظلة تنطف السمن والعسل. بمعنى حديث يونس.
17 -م-2 — 2269 وحدثناه محمد بن رافع. حدثنا عبدالرزاق. أخبرنا معمر عن الزهري، عن عبيدالله بن عبدالله بن عتبة، عن ابن عباس أو أبي هريرة. قال عبدالرزاق: كان معمر أحيانا يقول: عن ابن عباس. وأحيانا يقول: عن أبي هريرة؛
أن رجلا أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: إني أرى الليلة ظلة. بمعنى حديثهم.
17 -م-3 — 2269 وحدثنا عبدالله بن عبدالرحمن الدارمي. حدثنا محمد بن كثير. حدثنا سليمان، وهو ابن كثير، عن الزهري، عن عبيدالله بن عبدالله، عن ابن عباس؛ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان مما يقول لأصحابه "من رأى منكم رؤيا فليقصها أعبرها له" قال فجاء رجل فقال: يا رسول الله رأيت ظلة. بنحو حديثهم.