Муслим — 2144.

2144. Передают от Анаса, сказавшего: «Умер сын Абу Тальхи от Умм Суляйм и она сказала своей семье: «Не рассказывайте Абу Тальхе про его сына, пока я сама не скажу ему». «И тот пришёл. Она же поднесла ему ужин и он поел, и попил». «Затем она приготовилась для него прекраснее, чем когда бы то ни было, и он пал с нею. Убедившись в том, что он насытился и получил от неё (удовольствие), она произнесла: «Абу Тальха. Как ты думаешь, если бы народ отдал взаймы семье некого дома что-нибудь, а после потребовал бы это. Смеют ли те отказаться (вернуть) им (этот предмет)?» Он ответил: «Нет». Она сказала: «Крепись и помни о награде за твоего сына…» «И тот разгневался, сказав: «Сначала я побарахтался (с тобою) и потом ты сообщаешь мне о моём сыне?!» И вышел. Придя к Посланнику Аллаха, он сообщил ему о том, что было и Посланник Аллаха, сказал: «Да устроит Аллах благодать вам обоим в пыли этой вашей ночи!» «И она понесла (забеременела)». «А был Посланник Аллаха, в путешествии. Она была с ним. Ну, а Посланник Аллаха, подступая к Медине, не стучался в неё ночью. Когда они приблизились к Медине, её ударили предродовые схватки. И (для присмотра) за ней Абу Тальха задержался, а Посланник Аллаха, отправился. «А Тальха говорит: «Ты, конечно, знаешь, Господи, что мне так хочется ходить (в походы) вместе с Посланником Твоим и заходить вместе с ним, но теперь я задерживаюсь из-за этого, что Ты видишь!» «А Умм Суляйм говорит: «Абу Тальха, кажется, у меня прошло. Можешь отправляться». И мы отправились». «И ударили её предродовые схватки, когда оба прибыли (в Медину). Она родила мальчика и моя мама сказала мне: «Анас. Да не покормит его грудью ни один, пока поутру мы не снесём его к Посланнику Аллаха, «. Наутро она отправилась с ним к Посланнику Аллаха, «. «Она застала его вместе с Майсамом. Увидев же меня, он сказал: «Кажется, Умм Суляйм родила». Я сказала: «Да». И Май-сам был положен». «И я поднесла его и положила его ему на колени. Тогда Посланник Аллаха, попросил принести финик аджву из мединских фиников аджва и принялся жевать их в своём рту, пока они не превратились в кашицу, а затем он бросил их в рот ребёнка и ребёнок принялся мусолить её». Он сказал: «И Посланник Аллаха, произнёс: «Посмотрите, как ансары любят финики!» «И он протёр его лицо и назвал его Абдуллой».

22 — 2144 حدثنا عبدالأعلى بن حماد. حدثنا حماد بن سلمة عن ثابت البناني، عن أنس ابن مالك، قال:

ذهبت بعبدالله بن أبي طلحة الأنصاري إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم حين ولد. ورسول الله صلى الله عليه وسلم في عباءة يهنأ بعيرا له. فقال (هل معك تمر؟) فقلت: نعم. فناولته تمرات. فألقاهن في فيه. فلاكهن. ثم فغر فا الصبي فمجه في فيه. فجعل الصبي يتلمظه. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم (حب الأنصار التمر) وسماه عبدالله.

23 — 2144 حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة. حدثنا يزيد بن هارون. أخبرنا ابن عون عن ابن سيرين، عن أنس بن مالك. قال:

كان ابن لأبي طلحة يشتكي. فخرج أبو طلحة. فقبض الصبي. فلما رجع أبو طلحة قال: ما فعل ابني؟ قالت أم سليم: هو أسكن مما كان. فقربت إليه العشاء فتعشى. ثم أصاب منها. فلما فرغ قالت: واروا الصبي. فلما أصبح أبو طلحة أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخبره. فقال (أعرستم الليلة؟) قال: نعم. قال (اللهم! بارك لهما) فولدت غلاما. فقال لي أبو طلحة: احمله حتى تأتي به النبي صلى الله عليه وسلم. فأتى به النبي صلى الله عليه وسلم. وبعثت معه بتمرات. فأخذه النبي صلى الله عليه وسلم فقال (أمعه شيء؟) قالوا: نعم. تمرات. فأخذها النبي صلى الله عليه وسلم فمضغها. ثم أخذها من فيه. فجعلها في في الصبي. ثم حنكه، وسماه عبدالله.

2144 — حدثنا محمد بن بشار. حدثنا حماد بن مسعدة. حدثنا ابن عون عن محمد، عن أنس، بهذه القصة، نحو حديث يزيد.

107 — 2144 حدثني محمد بن حاتم بن ميمون. حدثنا بهز. حدثنا سليمان بن المغيرة عن ثابت، عن أنس. قال:

مات ابن لأبي طلحة من أم سليم. فقالت لأهلها: لا تحدثوا أبا طلحة بابنه حتى أكون أنا أحدثه. قال فجاء فقربت إليه عشاء. فأكل وشرب. فقال: ثم تصنعت له أحسن ما كانت تصنع قبل ذلك. فوقع بها. فلما رأت أنه قد شبع وأصاب منها، قالت: يا أبا طلحة! أرأيت لو أن قوما أعاروا عاريتهم أهل بيت، فطلبوا عاريتهم، ألهم أن يمنعوهم؟ قال: لا. قالت: فاحتسب ابنك. قال فغضب وقال: تركتني حتى تلطخت ثم أخبرتني بابني! فانطلق حتى أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم. فأخبره بما كان. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم "بارك الله لكما في غابر ليلتكما" قال فحملت. قال فكان رسول الله صلى الله عليه وسلم في سفر وهي معه. وكان رسول الله صلى الله عليه وسلم، إذا أتى المدينة من سفر، لا يطرقها طروقا. فدنوا من المدينة. فضربها المخاض. فاحتبس عليها أبو طلحة. وانطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم. قال يقول أبو طلحة: إنك لتعلم، يا رب! إنه ليعجبني أن أخرج مع رسولك إذا خرج، وأدخل معه إذا دخل. وقد احتبست بما ترى. قال تقول أم سليم: يا أبا طلحة! ما أجد الذي كنت أجد. انطلق. فانطلقنا. قال وضربها المخاض حين قدما. فولدت غلاما. فقالت لي أمي: يا أنس! لا يرضعه أحد حتى تغدو به على رسول الله صلى الله عليه وسلم. فلما أصبح احتملته. فانطلقت به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم. قال فصادفته ومعه ميسم. فلما رآني قال "لعل أم سليم ولدت؟" قلت: نعم. فوضع الميسم. قال وجئت به فوضعته في حجره. ودعا رسول الله صلى الله عليه وسلم بعجوة من عجوة المدينة. فلاكها في فيه حتى ذابت. ثم قذفها في في الصبي. فجعل الصبي يتلمظها. قال فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم "انظروا إلى حب الأنصار للتمر" قال فمسح وجهه وسماه عبدالله.

107 -م — 2144 حدثنا أحمد بن الحسن بن خراش. حدثنا عمرو بن عاصم. حدثنا سليمان بن المغيرة. حدثنا ثابت. حدثني أنس بن مالك قال: مات ابن لأبي طلحة. واقتص الحديث بمثله.

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