Муслим — 2763.

2763. Сообщают от Абдуллы, сказавшего: «Пришёл мужчина к Пророку, и сказал: «Посланник Аллаха! Я пристал к женщине у окраины Медины и кое-что мне к сожалению удалось сделать, однако я не коснулся её. Осуди же меня как захочешь!» Тогда Умар сказал: «Аллах же покрыл твой грех! И зачем ты сам про себя рассказал?!» Он сказал: «Пророк же, не ответил ничего. Тогда этот мужчина ушёл и за ним последовал Пророк, пешком. Он позвал его и продекламировал ему этот аят: «Устанавливай молитву в обоих краях дня и в сумеречное время ночи. Истинно, хасанаты изводят саййиаты. Это — памятка для вспоминающих». И некий мужчина из народа сказал: «Пророк Аллаха! Этот аят распространяется только на него лично?» Он ответил: «Нет. На всех людей».

39 — 2763 حدثنا قتيبة بن سعيد وأبو كامل، فضيل بن حسين الجحدري. كلاهما عن يزيد بن زريع (واللفظ لأبي كامل). حدثنا يزيد. حدثنا التيمي عن أبي عثمان، عن عبدالله بن مسعود؛

أن رجلا أصاب من امرأة قبلة. فأتى النبي صلى الله عليه وسلم فذكر ذلك له. قال فنزلت: {أقم الصلاة طرفي النهار وزلفى من الليل، إن الحسنات يذهبن السيئات ذلك ذكرى للذاكرين} [11 /هود /114]. قال فقال الرجل: ألي هذه؟ يا رسول الله! قال "لمن عمل بها من أمتي".

40 — 2763 حدثنا محمد بن عبدالأعلى. حدثنا المعتمر عن أبيه. حدثنا أبو عثمان عن ابن مسعود؛

أن رجلا أتى النبي صلى الله عليه وسلم. فذكر أنه أصاب من امرأة، إما قبلة، أو مسا بيد، أو شيئا. كأنه يسأل عن كفارتها. قال فأنزل الله عز وجل. ثم ذكر بمثل حديث يزيد.

41 — 2763 حدثنا عثمان بن أبي شيبة. حدثنا جرير عن سليمان التيمي، بهذا الإسناد. قال:

أصاب رجل من امرأة شيئا دون الفاحشة. فأتى عمر بن الخطاب فعظم عليه. ثم أتى أبا بكر فعظم عليه. ثم أتى النبي صلى الله عليه وسلم. فذكر بمثل حديث يزيد والمعتمر.

42 — 2763 حدثنا يحيى بن يحيى وقتيبة بن سعيد وأبو بكر بن أبي شيبة — واللفظ ليحيى — (قال يحيى: أخبرنا. وقال الآخران: حدثنا) أبو الأحوص عن سماك، عن إبراهيم، عن علقمة والأسود، عن عبدالله قال:

جاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله! إني عالجت امرأة في أقصى المدينة. وإني أصبت منها ما دون أن أمسها. فأنا هذا. فاقض في ما شئت. فقال له عمر: لقد سترك الله، لو سترت نفسك. قال فلم يرد النبي صلى الله عليه وسلم شيئا. فقام الرجل فانطلق. فأتبعه النبي صلى الله عليه وسلم رجلا دعاه، وتلا عليه هذه الآية: {أقم الصلاة طرفي النهار وزلفى من الليل إن الحسنات يذهبن السيئات ذلك ذكرى للذاكرين} [11/هود/114]. فقال رجل من القوم:يا نبي الله! هذا له خاصة؟ قال "بل للناس كافة".

43 — 2763 حدثنا محمد بن المثنى. حدثنا أبو النعمان، الحكم بن عبدالله العجلي. حدثنا شعبة عن سماك بن حرب. قال: سمعت إبراهيم يحدث عن خاله الأسود، عن عبدالله، عن النبي صلى الله عليه وسلم بمعنى حديث أبي الأحوص. وقال في حديثه: فقال معاذ: يا رسول الله! هذا لهذا خاصة، أو لنا عامة؟ قال "بل لكم عامة".

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